विज्ञान-आधारित पोषक तत्व प्रबंधन (उर्वरकों का संतुलित उपयोग) अपनाने के राष्ट्रीय जागरूकता अभियान के तहत, ‘मेरा गांव मेरा गौरव’ (MGMG) कार्यक्रम के अंतर्गत आज रायपुर जिले के अदसेना गांव में एक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य किसानों के बीच टिकाऊ कृषि, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन, प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन प्रथाओं के प्रति जागरूकता पैदा करना था।

इस अवसर पर वैज्ञानिकों ने मिट्टी की उर्वरता और फसल उत्पादकता में सुधार के लिए संतुलित उर्वरक अनुप्रयोग, मृदा परीक्षण, मृदा स्वास्थ्य कार्ड (Soil Health Card), फसल चक्र, हरी खाद, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन (INM), केंचुआ खाद (वर्मीकंपोस्टिंग) और कुशल जल प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला। इसके साथ ही, किसानों को बीजामृत, जीवामृत और घनजीवामृत तैयार करने और उनके उपयोग के बारे में प्रशिक्षित किया गया, साथ ही मृदा स्वास्थ्य को बनाए रखने में हरी खाद के रूप में ढैंचा की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग के साथ जैविक और प्राकृतिक इनपुट को एकीकृत करके पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ कृषि पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस जागरूकता कार्यक्रम में गांव के सरपंच डॉ. तेज राम पाल सहित लगभग 35 किसानों ने भाग लिया और टिकाऊ कृषि प्रौद्योगिकियों और पोषक तत्व प्रबंधन प्रथाओं पर वैज्ञानिकों के साथ सक्रिय रूप से विचार-विमर्श किया। यह कार्यक्रम भाकृअनुप-एनआईबीएसएम (ICAR-NIBSM) के वरिष्ठ वैज्ञानिकों डॉ. श्रीधर जे., डॉ. मल्लिकाजुर्न जे. और डॉ. विनोद वासनिक के साथ डॉ. पी. मूवेंथन, वरिष्ठ वैज्ञानिक (कृषि विस्तार) द्वारा समन्वित किया गया था, जबकि एमजीएमजी (MGMG) कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. ए. अमरेंद्र रेड्डी हैं।





