भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर-नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ बायोटिक स्ट्रेस मैनेजमेंट), रायपुर द्वारा खरीफ मौसम-2026 की तैयारियों को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से जून माह के दौरान पूरे रायपुर जिले में एक माह तक व्यापक ‘खेत बचाओ अभियान’ संचालित किया गया। अभियान के तहत तिल्दा, धरसीवा और आरंग विकासखंडों के विभिन्न गांवों में वैज्ञानिक जागरूकता एवं क्षमता संवर्धन कार्यक्रम आयोजित कर 1,720 किसानों एवं हितधारकों** को आधुनिक एवं वैज्ञानिक कृषि तकनीकों की जानकारी प्रदान की गई।
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अभियान के दौरान 36 ग्राम स्तरीय जागरूकता कार्यक्रमों** का आयोजन किया गया, जिनमें 1,010 पुरुष एवं 710 महिला किसानों सहित कुल 1,720 प्रतिभागियों ने भाग लिया। सभी कार्यक्रमों में स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी रही, जिससे वैज्ञानिक कृषि तकनीकों के प्रसार को व्यापक जनसमर्थन मिला।

कार्यक्रमों में किसानों को समेकित कीट एवं रोग प्रबंधन, जैविक तनावों की समय पर पहचान एवं नियंत्रण, मृदा स्वास्थ्य के अनुरूप संतुलित एवं विवेकपूर्ण उर्वरक प्रबंधन, जलवायु-अनुकूल कृषि पद्धतियों तथा दक्षिण-पश्चिम मानसून के विलंबित आगमन की स्थिति में वैकल्पिक फसल एवं आकस्मिक कृषि योजना संबंधी वैज्ञानिक सुझाव दिए गए। इसके साथ ही संभावित उत्पादन जोखिम को कम करने तथा कृषि को अधिक लचीला एवं टिकाऊ बनाने के लिए फसल प्रबंधन संबंधी नवीनतम तकनीकी परामर्श भी उपलब्ध कराया गया।
अभियान के अंतर्गत भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान, रायपुर परिसर में भी विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। इनमें प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) कार्यक्रम में 220 से अधिक किसानों एवं प्रतिभागियों** ने भाग लिया। इस अवसर पर किसानों और वैज्ञानिकों के बीच प्रत्यक्ष संवाद हुआ तथा कृषि संबंधी विभिन्न विषयों पर विस्तृत चर्चा की गई।
मैदानी स्तर पर अभियान का संचालन डॉ. प्रियंका मीणा एवं डॉ. के. सी. शर्मा ने किया। दोनों वैज्ञानिकों ने किसानों से सीधे संवाद स्थापित कर फसल सुरक्षा, पोषक तत्व प्रबंधन तथा जलवायु-अनुकूल कृषि तकनीकों से संबंधित प्रश्नों का समाधान किया। अभियान का समन्वय भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान, रायपुर के संयुक्त निदेशक डॉ. ए. अमरेंद्र रेड्डी ने नोडल अधिकारी के रूप में किया। यह अभियान संस्थान के निदेशक डॉ. पी. के. राय के मार्गदर्शन में संचालित किया गया।
डॉ. राय ने अभियान की सफलता पर वैज्ञानिक दल की सराहना करते हुए कहा कि किसानों तक अनुसंधान आधारित कृषि प्रौद्योगिकियों का प्रभावी हस्तांतरण संस्थान की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान भविष्य में भी किसान-केंद्रित विस्तार गतिविधियों के माध्यम से टिकाऊ, वैज्ञानिक एवं जलवायु-सहिष्णु कृषि को बढ़ावा देने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।





