भिलाई स्टील प्लांट ने उन्नत औद्योगिक हाइड्रोलिक्स प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया; इंजीनियरों और रखरखाव कर्मियों की तकनीकी दक्षता बढ़ाने की पहल।

सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) के मानव संसाधन–ज्ञानार्जन एवं विकास विभाग द्वारा भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) के अंतर्गत संचालित एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, दुर्ग के सहयोग से तीन दिवसीय ‘एडवांस्ड इंडस्ट्रियल हाइड्रॉलिक्स’ प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संयंत्र के अभियंताओं एवं अनुरक्षण कार्मिकों की तकनीकी दक्षता को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। इसके साथ ही, उन्हें आधुनिक औद्योगिक हाइड्रॉलिक प्रणालियों, अत्याधुनिक अनुरक्षण तकनीकों और प्रभावी समस्या-निवारण (ट्रबलशूटिंग) पद्धतियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करना भी इस कार्यक्रम का एक प्रमुख लक्ष्य रहा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों को आधुनिक औद्योगिक हाइड्रॉलिक प्रणालियों के संचालन, अनुरक्षण एवं समस्या-विश्लेषण से संबंधित सैद्धांतिक एवं व्यावहारिक, दोनों प्रकार का गहन प्रशिक्षण दिया गया। कक्षा आधारित तकनीकी सत्रों के साथ-साथ हैंड्स-ऑन प्रैक्टिकल सत्रों का भी आयोजन किया गया, जिसके माध्यम से प्रतिभागियों को वास्तविक औद्योगिक परिस्थितियों के अनुरूप कार्य करने का अमूल्य व्यावहारिक अनुभव प्राप्त हुआ। यह अनूठा अनुभव उन्हें आधुनिक हाइड्रॉलिक अनुप्रयोगों की बेहतर समझ विकसित करने, कार्यस्थल पर त्वरित समस्या-समाधान क्षमता बढ़ाने तथा संयंत्र के उपकरणों की विश्वसनीयता एवं परिचालन दक्षता में उल्लेखनीय सुधार लाने में सहायक सिद्ध होगा।

इस त्रि-दिवसीय कार्यक्रम में औद्योगिक सुरक्षा, व्यवस्थित अनुरक्षण प्रणाली तथा तेजी से बदलती औद्योगिक तकनीकों को अपनाने के महत्व पर भी विशेष बल दिया गया। सत्रों के दौरान प्रतिभागियों को सुरक्षित कार्य व्यवहार, निवारक अनुरक्षण (प्रिवेंटिव मेंटेनेंस) तथा नवीनतम औद्योगिक प्रौद्योगिकियों के प्रभावी उपयोग के संबंध में विस्तृत और व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई। इस अवसर पर संयंत्र के वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि भिलाई इस्पात संयंत्र, एमएसएमई टेक्नोलॉजी सेंटर, दुर्ग जैसे प्रतिष्ठित सरकारी संस्थानों के सहयोग से नियमित रूप से ऐसे उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रहा है, जिससे संयंत्र के ज्ञानार्जन एवं विकास तंत्र को निरंतर सुदृढ़ और अद्यतन बनाने में मदद मिल रही है।

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