वीपी तिवारी की रिपोर्ट
चिरमिरी। एमसीबी जिले की कोयलांचल नगरी चिरमिरी में अंजन हिल और बरतुंगा माइंस को ओपन कास्ट तरीके से संचालित किए जाने की प्रस्तावित योजना को लेकर पर्यावरण और स्थानीय आजीविका से जुड़े सवाल उठने लगे हैं। वर्षों तक अंडरग्राउंड पद्धति से संचालित रही इन खदानों के भविष्य को लेकर अब खुली खदान के रूप में दोबारा संचालन की प्रक्रिया आगे बढ़ने की चर्चा है। इस बीच परियोजना की पर्यावरणीय लागत और स्थानीय लोगों पर संभावित प्रभाव को लेकर बहस तेज हो गई है।
जानकारी के अनुसार, अंजन हिल और बरतुंगा हिल माइंस में लंबे समय तक भूमिगत तरीके से कोयला उत्पादन किया जाता रहा। वर्ष 2010 में हुए बड़े हादसे के बाद खदानों का संचालन बंद हो गया था। अब एसईसीएल के तहत निजी कंपनी के माध्यम से ओपन कास्ट माइनिंग शुरू करने की प्रक्रिया आगे बढ़ने की बात सामने आ रही है। परियोजना को लेकर जनसुनवाई आयोजित किए जाने की भी जानकारी है।

बताया जा रहा है कि प्रस्तावित परियोजना का कुल क्षेत्रफल करीब 388 हेक्टेयर है, जिसमें 211 हेक्टेयर से अधिक वन भूमि शामिल है। यही आंकड़ा परियोजना के पर्यावरणीय प्रभाव को लेकर सबसे महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है। क्षेत्र की पहाड़ियों और जंगलों में बड़ी संख्या में पुराने वृक्ष मौजूद हैं। ऐसे में ओपन कास्ट खनन के लिए पहाड़ी क्षेत्र में बड़े स्तर पर बदलाव और वन क्षेत्र के उपयोग से जैव विविधता, हरित आवरण और स्थानीय पारिस्थितिकी पर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
पहाड़ों के स्वरूप में बदलाव की चिंता
ओपन कास्ट खनन में सतह पर मौजूद मिट्टी और चट्टानों को हटाकर कोयला निकाला जाता है। ऐसे में अंजन हिल और बरतुंगा क्षेत्र की प्राकृतिक पहाड़ियों के स्वरूप में व्यापक परिवर्तन की संभावना है। वन भूमि के उपयोग और पेड़ों की कटाई की स्थिति में क्षेत्र के हरित आवरण पर भी असर पड़ सकता है।

स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि यदि बड़े पैमाने पर वृक्षों की कटाई होती है तो इसका असर केवल जंगल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आसपास के गांवों के पर्यावरण और जीवन-परिस्थितियों पर भी पड़ सकता है।
भूजल, धूल और प्रदूषण को लेकर आशंकाएं
परियोजना से जुड़े क्षेत्रों के ग्रामीणों के बीच भूजल स्तर, धूल, वायु प्रदूषण और जलस्रोतों पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंताएं सामने आ रही हैं। हालांकि इन प्रभावों की वास्तविक स्थिति का आकलन पर्यावरणीय अध्ययन और संबंधित विभागों की स्वीकृत शर्तों के आधार पर किया जाना महत्वपूर्ण होगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र में खनन गतिविधियां बढ़ने के साथ परिवहन, भारी वाहनों की आवाजाही और धूल की समस्या भी बढ़ सकती है। ऐसे में परियोजना शुरू होने से पहले पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय आबादी की सुरक्षा के लिए प्रस्तावित उपायों की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक किए जाने की मांग उठ रही है।
रोजगार बनाम पर्यावरण का सवाल
परियोजना के पक्ष में रोजगार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों में वृद्धि की संभावनाएं महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं। खनन गतिविधियां शुरू होने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद की जा सकती है। दूसरी ओर, स्थानीय स्तर पर यह सवाल भी उठ रहा है कि आर्थिक विकास के साथ पर्यावरणीय नुकसान को किस तरह संतुलित किया जाएगा।
निजी भूमि के अधिग्रहण की आवश्यकता नहीं होने की बात कही जा रही है, लेकिन परियोजना में शामिल वन भूमि और पहाड़ी क्षेत्र को लेकर पर्यावरणीय प्रभाव का प्रश्न अलग है। इसलिए स्थानीय लोगों की मांग है कि परियोजना से जुड़े सभी पर्यावरणीय आकलन, वन भूमि संबंधी अनुमति, पुनर्वनीकरण की योजना और प्रभावित क्षेत्रों के लिए प्रस्तावित सुरक्षा उपायों की जानकारी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट की जाए।
आने वाली पीढ़ियों को लेकर चिंता
चिरमिरी की पहचान लंबे समय से कोयला खनन और प्राकृतिक पहाड़ी क्षेत्र दोनों से जुड़ी रही है। ऐसे में अंजन हिल और बरतुंगा में प्रस्तावित ओपन कास्ट खनन केवल एक औद्योगिक परियोजना नहीं, बल्कि क्षेत्र के भविष्य के पर्यावरण और स्थानीय जीवनशैली से जुड़ा विषय भी बन गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि खनन से मिलने वाले रोजगार और आर्थिक लाभ के साथ जंगल, पहाड़, जलस्रोत और स्थानीय पर्यावरण की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाएगी। परियोजना के आगे बढ़ने के साथ स्थानीय लोगों की आपत्तियों, पर्यावरणीय आकलन और संबंधित विभागों की शर्तों पर पारदर्शी चर्चा इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण होगी।

