आठ दिन से मटमैले पानी की सप्लाई, झगराखांड में लोगों का फूटा गुस्सा
वीपी तिवारी की रिपोर्ट
झगराखांड। नगर पंचायत झगराखांड में पिछले करीब एक सप्ताह से घरों में मटमैले और दूषित पानी की आपूर्ति किए जाने से नगरवासियों की परेशानी बढ़ गई है। नलों से साफ पानी की जगह गंदा पानी आने की शिकायत लगातार सामने आने के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी है। लोगों का कहना है कि पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा में इस तरह की लापरवाही सीधे उनके स्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर मामला है।
दूषित पानी की समस्या को लेकर नगर पंचायत की नेता प्रतिपक्ष हेमलता कोमल कुमार ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए तत्काल व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नगरवासियों को लगातार कई दिनों से मटमैला पानी मिलने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं होना गंभीर प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है।
पर्याप्त क्लोरीन-ब्लीचिंग की व्यवस्था के दावे पर सवाल
नेता प्रतिपक्ष ने नगर पंचायत की जल शुद्धिकरण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले नगर पंचायत के निवर्तमान मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) पात्रे ने पार्षदों को जानकारी दी थी कि आगामी दो वर्षों के लिए जल शुद्धिकरण में इस्तेमाल होने वाले क्लोरीन और ब्लीचिंग पाउडर की पर्याप्त व्यवस्था कर ली गई है।
ऐसे में उनका सवाल है कि यदि जल शुद्धिकरण के लिए जरूरी सामग्री पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है, तो नगरवासियों के घरों तक साफ और सुरक्षित पानी क्यों नहीं पहुंच रहा है। उन्होंने प्रशासन से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि जल शुद्धिकरण की प्रक्रिया में आखिर कहां कमी रह रही है।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
लगातार मटमैला पानी मिलने से नगरवासियों में स्वास्थ्य को लेकर भी चिंता बढ़ रही है। दूषित पेयजल के कारण जलजनित बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों ने पानी की गुणवत्ता की जांच कराने और समस्या के वास्तविक कारण का पता लगाने की मांग की है।
हेमलता कोमल कुमार ने कहा कि स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना नगर पंचायत की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि प्रभावित क्षेत्रों से पानी के नमूने लेकर उनकी जांच कराई जाए तथा रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पानी दूषित होने की वजह क्या है।
सिर्फ आश्वासन नहीं, स्थायी समाधान की मांग
नगरवासियों का कहना है कि समस्या यदि तकनीकी खराबी, पाइपलाइन में गड़बड़ी, जलस्रोत में प्रदूषण या शुद्धिकरण प्रक्रिया में कमी के कारण उत्पन्न हुई है तो नगर पंचायत को इसकी तत्काल जांच करनी चाहिए। केवल अस्थायी तौर पर पानी की आपूर्ति बहाल करने के बजाय ऐसी व्यवस्था जरूरी है जिससे भविष्य में दोबारा इस तरह की समस्या उत्पन्न न हो।
नेता प्रतिपक्ष ने प्रशासन से जलापूर्ति व्यवस्था की जांच कराने, पानी की गुणवत्ता की नियमित निगरानी करने और लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नगर की जनता को सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने में किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाना चाहिए।
अब देखना होगा कि नगर पंचायत प्रशासन दूषित पानी की शिकायत पर कितनी जल्दी कार्रवाई करता है और नगरवासियों को कब तक स्वच्छ एवं सुरक्षित पेयजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित हो पाती है।

