संतुलित उर्वरक उपयोग और जैव-संसाधन केंद्रों से टिकाऊ खेती को मिलेगा बढ़ावा: आईसीएआर–एनआईबीएसएम

संतुलित उर्वरक उपयोग और जैव-संसाधन केंद्रों के माध्यम से टिकाऊ खेती पर जोर

आईसीएआर-एनआईबीएसएम संस्थान में किसान उत्पादक संगठन सदस्यों का प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित

Go back

Your message has been sent

Warning
Warning
Warning
Warning

Warning.

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान (आईसीएआर–एनआईबीएसएम), रायपुर द्वारा प्रोफेशनल असिस्टेंस फॉर डेवलपमेंट एक्शन (प्रदान) के सहयोग से गुरुवार को संस्थान परिसर में “किसान उत्पादक संगठन सदस्यों के लिए उर्वरकों के दक्ष उपयोग एवं जैव-संसाधन केंद्रों के प्रोत्साहन” विषय पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) सदस्यों को संतुलित उर्वरक उपयोग, समेकित पोषक तत्व प्रबंधन तथा टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रति जागरूक करना था, ताकि मृदा स्वास्थ्य में सुधार के साथ फसल उत्पादकता को बढ़ाया जा सके।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में कोटा एवं तिल्दा विकासखंडों के लगभग 30 किसान उत्पादक संगठन सदस्यों ने भाग लिया। उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पी. के. राय ने टिकाऊ कृषि विकास के लिए उर्वरकों के विवेकपूर्ण उपयोग, पर्यावरण अनुकूल तकनीकों तथा वैज्ञानिक मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन के महत्व पर बल दिया।

महात्मा गांधी राष्ट्रीय फैलोशिप एवं ग्रामोदय मिशन कार्यक्रम के नोडल अधिकारी डॉ. ए. अमरेंद्र रेड्डी ने कार्यक्रम का समन्वय किया, जबकि सह-समन्वयक के रूप में डॉ. प्रियंका मीणा ने सहयोग प्रदान किया।

तकनीकी सत्रों में विभिन्न कृषि एवं अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञों ने जैव उर्वरकों, संतुलित उर्वरक उपयोग तथा पोषक तत्व प्रबंधन की प्रभावी तकनीकों पर व्याख्यान दिए। इनमें भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद–राष्ट्रीय जैविक तनाव प्रबंधन संस्थान के डॉ. अनिल गुप्ता, अंतरराष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रिसैट) के डॉ. पुरुषोत्तम, राष्ट्रीय पादप स्वास्थ्य प्रबंधन संस्थान (एनआईपीएचएम), हैदराबाद की डॉ. श्रीलता, विश्वभारती विश्वविद्यालय के डॉ. एस. के. शर्मा तथा डॉ. अर्का प्रवा शामिल रहे।

विशेषज्ञों ने टिकाऊ कृषि को बढ़ावा देने तथा रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने में जैव-संसाधन केंद्रों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने वैज्ञानिकों के साथ संवाद कर पोषक तत्व प्रबंधन एवं मृदा उर्वरता से जुड़ी व्यावहारिक चुनौतियों पर चर्चा की।

व्यावहारिक प्रशिक्षण के अंतर्गत प्रतिभागियों को संस्थान के कृषि फार्म स्थित मूंग फसल क्षेत्र का भ्रमण कराया गया, जहां वैज्ञानिक फसल प्रबंधन तकनीकों का प्रदर्शन किया गया। इस भ्रमण में किसान उत्पादक संगठन सदस्यों ने विशेष रुचि दिखाई। कार्यक्रम का समापन सहभागियों से प्राप्त सुझावों एवं प्रशिक्षण सामग्री वितरण के साथ हुआ।

Editor In Chief Sheetal  के बारे में
For Feedback - newslive7000@gmail.com

LATEST Post

© 2026 | All rights reserved | Made With By WebpressHub.net