एम्स रायपुर में “तृतीय वार्षिक पीडियाट्रिक न्यूट्रिशन कोर मीट 2026” का सफल आयोजन; बाल स्वास्थ्य में नैदानिक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने पर जोर

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायपुर के क्लिनिकल न्यूट्रिशन एवं डायटेटिक्स विभाग द्वारा आईएपीईएन (IAPEN) रायपुर चैप्टर एवं इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स (आईएपी) छत्तीसगढ़ के सहयोग से “तृतीय वार्षिक पीडियाट्रिक न्यूट्रिशन कोर मीट 2026” का सफल आयोजन किया गया। इस वर्ष के सम्मेलन का मुख्य विषय “क्लिनिकल न्यूट्रिशन प्रैक्टिस में उत्कृष्टता का संवर्धन” रहा, जिसका उद्देश्य अकादमिक अनुसंधान और व्यावहारिक चिकित्सा के बीच के अंतर को कम करना है ताकि बच्चों के स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाया जा सके।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि एम्स रायपुर के कार्यपालक निदेशक एवं सीईओ, लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (Retd) द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर एम्स रायपुर की अधिष्ठाता डॉ. एली मोहापात्रा, आईएपीईएन रायपुर चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. विशाल कुमार और सचिव सुश्री जूली पांडेय विशेष रूप से उपस्थित रहीं। गणमान्य अतिथियों ने सामूहिक रूप से इस बात पर बल दिया कि बाल चिकित्सा में जटिल पोषण संबंधी चुनौतियों के समाधान के लिए बहुविषयक सहयोग और निरंतर शोध अत्यंत आवश्यक हैं।

अपने संबोधन में लेफ्टिनेंट जनरल अशोक जिंदल (Retd) ने रेखांकित किया कि बच्चों का उचित पोषण एक स्वस्थ और सशक्त राष्ट्र की आधारशिला है। उन्होंने कहा कि बच्चों में कुपोषण, चयापचय संबंधी विकारों (Metabolic Disorders) और गंभीर रूप से बीमार बच्चों के विशेष पोषण प्रबंधन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए वैज्ञानिक एवं बहुआयामी दृष्टिकोण अनिवार्य है। उन्होंने आयोजन समिति की अध्यक्ष सुश्री नुपुर जैन और डॉ. अनिल गोयल के साथ-साथ आयोजन सचिव सुश्री शालिनी सोरेन और डॉ. अतुल जिंदल के प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने नैदानिक विशेषज्ञता को मजबूत करने के लिए यह मंच प्रदान किया।

तकनीकी सत्रों में देशभर से आए प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने अपने विचार साझा किए। डॉ. प्रिया चितले ने बाल पोषण मूल्यांकन पर विस्तृत जानकारी दी, जबकि डॉ. लेखा श्रीधरन ने गंभीर रोगियों के प्रबंधन में न्यूट्रिशन सपोर्ट की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की। विशेष रूप से, “विश्व उच्च रक्तचाप दिवस 2026” के अवसर पर डॉ. निमेष साहू ने उच्च रक्तचाप की बढ़ती समस्या पर व्याख्यान दिया और संतुलित आहार व नियमित जांच के माध्यम से इसके बचाव की सलाह दी। कार्यक्रम में श्री जेक्का प्रदीप कुमार द्वारा “न्यूट्री-क्विज़” और सुश्री सपना बी. नायर द्वारा आधुनिक फीडिंग तकनीकों का लाइव प्रदर्शन भी किया गया।

सम्मेलन का समापन भविष्य में भी इस प्रकार की शैक्षणिक गतिविधियों को जारी रखने के संकल्प के साथ हुआ। डॉक्टरों, नर्सिंग अधिकारियों और स्वास्थ्य क्षेत्र के पेशेवरों सहित सभी प्रतिभागियों ने जन्मजात चयापचय विकारों और आधुनिक बाल पोषण चिकित्सा पर प्रदान किए गए व्यावहारिक ज्ञान की सराहना की। यह आयोजन विशिष्ट पोषण हस्तक्षेप के माध्यम से क्षेत्र में बाल स्वास्थ्य सेवाओं के मानकों को ऊपर उठाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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