सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने वित्त वर्ष 2025-26 में 1.98 लाख करोड़ रुपये का सर्वकालिक उच्च शुद्ध लाभ अर्जित किया, बैंकों को लगातार चौथे वर्ष लाभ

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने परिसंपत्ति गुणवत्ता में उल्लेखनीय सुधार के साथ अब तक की सबसे कम गैर-निष्पादित परिसंपत्ति दर्ज की, सकल एनपीए अनुपात घटकर 1.93 प्रतिशत और शुद्ध एनपीए अनुपात 31 मार्च 2026 तक 0.39 प्रतिशत हो गया – जो ऐतिहासिक रूप से सबसे न्यूनतम स्तर है

वित्त वर्ष 2025-26 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल कारोबार 12.8 प्रतिशत की मजबूत वार्षिक वृद्धि के साथ 283.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया

31.03.2026 तक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की अग्रिम ऋण राशि 15.7 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि के साथ 127 लाख करोड़ रुपये पहुंच गई, जिसमें खुदरा, कृषि और सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम क्षेत्रों में मजबूत वृद्धि रही

निरंतर सुधारों और सुदृढ़ शासन प्रथा से स्वस्थ बैलेंस शीट, बेहतर परिचालन क्षमता और मजबूत पूंजी पर्याप्तता द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक सशक्त हुए हैं

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों -पीएसबी का वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान मजबूत वित्तीय प्रदर्शन जारी रहा जो निरंतर व्यावसायिक वृद्धि, बेहतर परिसंपत्ति गुणवत्ता, रिकॉर्ड लाभप्रदता और मजबूत पूंजी स्थिति दर्शाता है। बैंकों का बेहतर प्रदर्शन तेजी से बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था की ऋण आवश्यकताएं पूरी करने में उनका स्थिति अनुरूप रूख, स्थिरता और बढ़ी हुई संस्थागत क्षमता दर्शाता है।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कुल कारोबार 31.03.2026 को बढ़कर 283.3 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 12.8 प्रतिशत की वृद्धि है। वार्षिक आधार पर कुल जमा राशि 10.6 प्रतिशत की वृद्धि के साथ बढ़कर 156.3 लाख करोड़ रुपये हो गई। यह जमाकर्ताओं के निरंतर विश्वास और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मजबूत संसाधन उपयोग को दर्शाती है। इन बैंको में सकल अग्रिम ऋण राशि में वार्षिक आधार पर 15.7 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 127 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में ऋण की निरंतर मांग दिखलाता है।

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान खुदरा, कृषि और लघु एवं मध्यम उद्यम (आरएएम) क्षेत्रों में ऋण वृद्धि व्यापक स्तर पर बनी रही। खुदरा, कृषि और लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) के लिए ऋणों में क्रमशः 18.1 प्रतिशत, 15.5 प्रतिशत और 18.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो उद्यमिता समर्थन, वित्तीय समावेशन सुदृढ़ बनाने और व्यापक आर्थिक विकास में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की महत्वपूर्ण भूमिका दर्शाती है।

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की परिसंपत्ति में उल्लेखनीय सुधार हुआ, जिसमें सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां अनुपात (बैंक के कुल ऋण में से फंसे हुए कर्ज जो उधारकर्ताओं द्वारा नहीं लौटाई गई) घटकर 1.93 प्रतिशत और शुद्ध एनपीए अनुपात (बैंकिंग क्षेत्र का महत्वपूर्ण वित्तीय संकेतक जो दर्शाता है कि प्रावधान के बाद बैंक के पास कितना वास्तविक फंसा हुआ कर्ज है) 31.03.2026 तक 0.39 प्रतिशत हो गया, जो तनावग्रस्त परिसंपत्तियों के ऐतिहासिक रूप से निम्न स्तर को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, सार्वजनिक क्षेत्र के प्रत्येक बैंक ने 90 प्रतिशत से अधिक का प्रोविजनिंग कवरेज (बैंकों द्वारा डूबे हुए कर्ज जैसे संभावित नुकसान की भरपाई के लिए मुनाफे में से अलग रखे गए धन की मात्रा) अनुपात बनाए रखा, जो विवेकपूर्ण प्रोविजनिंग प्रथाओं, बेहतर अंडरराइटिंग (जोखिम मूल्यांकन) मानकों, प्रभावी जोखिम प्रबंधन तंत्र और मजबूत बैलेंस शीट लचीलेपन को दर्शाता है।

वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान नए बकाया ऋण में लगातार गिरावट जारी रही, जिससे बकाया अनुपात घटकर 0.7 प्रतिशत हो गया। बट्टे खाते में डाले गए खातों से वसूली सहित कुल वसूली 86,971 करोड़ रुपये रही, जो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में बेहतर वसूली तंत्र और बेहतर ऋण अनुशासन दिखलाता है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की लाभप्रदता में सुधार की मुख्य वजह परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार, स्वस्थ ऋण विस्तार और उच्च आय रही। बैंकों का कुल परिचालन लाभ 3.21 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया, जबकि कुल शुद्ध लाभ में वार्षिक आधार पर 11.1 प्रतिशत की वृद्धि हुई और यह ऐतिहासिक रूप से 1.98 लाख करोड़ रुपये के उच्च स्तर पर पहुंच गया। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में लगातार चौथे वर्ष लाभप्रदता रही।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में पूंजी की स्थिति मजबूत बनी रही, और 31.03.2026 तक कुल सीआरएआर (पूंजी से जोखिम भारित परिसंपत्ति अनुपात) बढ़कर 16.6 प्रतिशत हो गया। यह सुधार आंतरिक संचय, संचित आय और वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 50,551 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने से संभव हुआ। सार्वजनिक क्षेत्र के सभी बैंकों में सीआरएआर 11.5 प्रतिशत की नियामक आवश्यकता से काफी ऊपर रहा, जो ऋण देना जारी रखने में सहायक बना।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की परिचालन दक्षता भी वर्ष के दौरान बेहतर हुई। इस दौरान लागत-से-आय अनुपात बढ़कर 49.67 प्रतिशत हो गया, जो बेहतर लागत प्रबंधन और प्रौद्योगिकी युक्त प्रणाली और डिजिटल परिवर्तन पहल के परिणाम दर्शाता है।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रदर्शन में लगातार सुधार भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और सरकार द्वारा बैंकिंग क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के निरंतर सुधारों को दर्शाता है। इनमें बेहतर शासन, प्रौद्योगिकी अपनाने, ऋण अनुशासन बढ़ाने और औपचारिक ऋण तक व्यापक पहुंच शामिल है। इन उपायों से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की तनावग्रस्त परिसंपत्तियों में कमी आई, परिचालन दक्षता में सुधार हुआ और वित्तीय स्थिति सुदृढ़ हुई।

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक आज अच्छी तरह पूंजीकृत, लाभदायक और संस्थागत रूप से मजबूत हैं, और भारत की विकास आकांक्षाओं में प्रभावी समर्थन देने तथा 2047 तक विकसित भारत की भविष्य योजना में सार्थक योगदान देने में सक्षम हैं।

Editor In Chief Sheetal  के बारे में
For Feedback - newslive7000@gmail.com

LATEST Post

© 2026 | All rights reserved | Made With By WebpressHub.net